सरकारी एम्बुलेंस में हुई डिलीवरी, नवजात का सिर धड़ से अलग, लापरवाही की इंतहा…

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बस्ती: सरकारी एम्बुलेंस में हुई डिलीवरी, नवजात का सिर धड़ से अलग, लापरवाही की इंतहा!

बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरहा बनहरा में स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला प्रकाश में आया है। यहाँ प्रसव के दौरान कथित तौर पर महिला स्टाफ की लापरवाही से एक नवजात शिशु का सिर धड़ से अलग हो गया। मामले को दबाने के लिए आनन-फानन में प्रसूता को निजी अस्पताल भेजा गया, जहाँ से उसे महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज बस्ती रेफर किया गया। वहाँ डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गर्भ में फंसा शिशु का सिर बाहर निकाला। पीड़ित महिला प्रेमा देवी कलवारी थाना क्षेत्र के मुरादपुर गांव की रहने वाली है और डिलीवरी के लिए सरकारी सिस्टम पर भरोसा करना उसके बच्चे के लिए काल बन गया।

पीड़ित महिला के परिजनों के अनुसार, सात माह की गर्भवती प्रेमा देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सरकारी एम्बुलेंस की मदद ली, महिला एंबुलेंस में सवार हुई और जिससे ही वह अस्पताल पहुंचने वाली थी कि अचानक उसे दर्द हुआ और एंबुलेंस में मौजूद आशा बहू ने लापरवाही पूर्वक प्रसव कराने का प्रयास किया, और इसी दौरान बच्चे का सिर महिला के पेट में ही रह गया और धड़ बाहर आ गया, इस जघन्य लापरवाही और अमानवीयता में महिला की जान जाते जाते बची। महिला के पति नीरज कुमार ने बटुआ कि वे अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर इलाज के लिए CHC कुदरहा लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात महिला स्टाफ ने विशेषज्ञ डॉक्टर की प्रतीक्षा करने के बजाय एंबुलेंस में ही महिला को दर्द का इंजेक्शन दे दिया और जबरन नॉर्मल डिलीवरी कराने का प्रयास करने लगीं। इसी आपाधापी में नवजात का धड़ तो बाहर आ गया, लेकिन सिर शरीर से अलग होकर गर्भ में ही रह गया।

 

महिला प्रेमा की सास शकुंतला ने बताया कि जब स्टाफ ने देखा कि बच्चे का सिर अलग हो गया है, तो उनके हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में अपनी गलती छुपाने के लिए उन्होंने प्रसूता की हालत गंभीर बताते हुए उसे पास के एक निजी अस्पताल भेज दिया। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने भी जोखिम को देखते हुए महिला को तत्काल जिला मेडिकल कॉलेज कैली के लिए रेफर कर दिया।

कैली अस्पताल में जब असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कल्पना मिश्रा और उनकी टीम ने महिला की जांच की, तो वे भी स्थिति देखकर हैरान रह गए। डॉ. मिश्रा ने बताया कि महिला अत्यंत गंभीर स्थिति में आई थी। अल्ट्रासाउंड और जांच में पता चला कि बच्चे का धड़ पहले ही अलग हो चुका है और सिर अंदर फंसा है। तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया और शिशु का सिर बाहर निकालकर महिला की जान बचाई गई। वर्तमान में महिला की हालत सुरक्षित बताई जा रही है।

 

इस वीभत्स घटना ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दी जा रही सेवाओं और स्टाफ की योग्यता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सात माह के प्री-मैच्योर केस में रिस्क लेने और इतनी बड़ी लापरवाही होने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से सख्त रुख सामने नहीं आया है।

असिस्टेस्टेंट प्रोफेसर कल्पना मिश्रा ने बताया कि मरीज जब हमारे पास आई तो उसकी स्थिति नाजुक थी। जांच में पता चला कि बच्चे का धड़ बाहर था और सिर अंदर रह गया था। हमने प्राथमिकता के आधार पर ऑपरेशन कर सिर बाहर निकाला। फिलहाल महिला सुरक्षित है और उसका इलाज चल रहा है।

डीएसपी कलवारी सर्किल संजय सिंह ने इस प्रकरण को लेकर बताया कि मामले की शिकायत पीड़ित महिला प्रेमा देवी के ससुर दुर्गाप्रसाद के द्वारा दो दिन पूर्व कलवारी थाने में की गई है, जिसकी का जांच कलवारी थाने के इंचार्ज कर रहे है, जो भी कार्यवाही है विधिक रूप से जांच के बाद की जाएगी।

 

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News 30 Express
Author: News 30 Express

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