शासन की विद्यालय विलय नीति जो छोटे बच्चों छात्रों के लिए बहुत ज्यादा चुनौती पूर्ण हो सकती है रिपोर्ट मुबीन खान

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शासन की विद्यालय विलय नीति जो छोटे बच्चों छात्रों के लिए बहुत ज्यादा चुनौती पूर्ण हो सकती है रिपोर्ट मुबीन खान

गरौठा झांसी।तहसील गरौठा ब्लॉक बामौर अंतर्गत ग्राम मछलीकाछ ग्राम के निवासियों ने 50 से कम बच्चों के विद्यालय निकटवर्ती दूसरे विद्यालय में विलय प्रक्रिया पर बच्चों के भविष्य को लेकर घोर चिंता व्यक्त की ग्रामीणों का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो वह अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे।
16 जून 2025 को योगी सरकार द्वारा जारी एक हालिया आदेश ने उत्तर प्रदेश में लाखों बच्चों के शिक्षा के भविष्य पर चिंता पैदा कर दी है।
इस आदेश (शासनादेश संख्या 68/5099/328/2025 – अनुभाग-5 (बेसिक शिक्षा) 1994409/2025) के अनुसार, 50 से कम छात्र छात्राओं वाले विद्यालयों को निकटवर्ती विद्यालयों में विलय कर दिया जाएगा।
इस कदम के पीछे का उद्देश्य संसाधनों का संरक्षण करना हो सकता है, लेकिन इससे छात्रों, विशेष रूप से कक्षा 1 से लेकर 5 तक के छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरे विद्यालय में विलय के परिणामस्वरूप छोटे-छोटे बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है जो छोटे बच्चों (छात्रों) के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि 5-6 साल के बच्चे अकेले 5/6 किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए नहीं जा सकते।
विद्यालय विलय नीति से 1 से लेकर 5 तक के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में स्कूल छोड़ सकते हैं जो शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन होगा।
वहीं शिक्षा के प्रति जापान देश का उदाहरण वहां का एक रेलवे स्टेशन जिसे यात्रियों की कमी के कारण वहां की सरकार ने बंद करने का फैसला किया था लेकिन जब वहां की सरकार को पता चला कि एक लड़की रोजाना इसी स्टेशन से स्कूल जाती है और वापस आती है उसके पास स्कूल जाने का कोई और साधन नहीं है तो वहां की सरकार ने ट्रेन को चालू रखने का फैसला किया था जिसमें लड़की के अलावा कोई और सवारी नहीं थी।
यह घटना जापान में शिक्षा के प्रति समर्पण और लोगों की देखभाल के उदाहरण के रूप में जानी जाती है।

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News 30 Express
Author: News 30 Express

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