मोंठ की शिवानी ने कजली महोत्सव में बिखेरा बुंदेली लोकगायन का रंग, कस्बे का नाम किया रोशन…

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मोंठ की शिवानी ने कजली महोत्सव में बिखेरा बुंदेली लोकगायन का रंग, कस्बे का नाम किया रोशन

झांसी जनपद के मोंठ कस्बे की मिट्टी में पली-बढ़ी लोक संस्कृति की खुशबू अब दूसरे जनपदों में भी अपनी पहचान बना रही है। बुंदेलखंड की समृद्ध लोक परंपरा और लोकगीतों को अपनी आवाज के जरिए नई पहचान देने वाली मोंठ की शिवानी ने जनपद महोबा में आयोजित कजली मेला महोत्सव में अपनी शानदार प्रस्तुति देकर न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि मोंठ कस्बे का नाम भी रोशन किया है।

दरअसल, जनपद महोबा में चल रहे कजली महोत्सव में बुंदेली लोक गायन की प्रस्तुति के लिए मोंठ की शिवानी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। शिवानी बुंदेली लोक गायिका हैं और उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग में पंजीकृत कलाकार के रूप में बुंदेली लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं।

कजली महोत्सव के मंच पर शिवानी ने जब बुंदेली बधाई और सौहर गीतों की प्रस्तुति शुरू की तो पूरा माहौल बुंदेलखंड की पारंपरिक संस्कृति के रंग में रंग गया। उनकी आवाज में बुंदेली माटी की मिठास और लोक परंपरा की झलक साफ नजर आई। शिवानी की प्रस्तुति को सुनकर मौजूद श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साह बढ़ाया और जमकर सराहना की।

बुंदेलखंड की लोक संस्कृति सदियों से अपनी अलग पहचान रखती है। यहां के बधाई, सौहर, आल्हा, फाग और अन्य लोकगीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। आधुनिक दौर में जहां पारंपरिक लोकगीतों की जगह धीरे-धीरे आधुनिक संगीत ले रहा है, वहीं शिवानी जैसी कलाकार अपनी आवाज के जरिए इस विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।

महोबा के कजली महोत्सव में शिवानी ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से बुंदेली लोकगायन की उसी परंपरा को मंच पर जीवंत किया। उनकी प्रस्तुति में बुंदेलखंड की मिट्टी, यहां के संस्कार और लोक जीवन की झलक दिखाई दी।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा शिवानी का सम्मान भी किया गया। सम्मान मिलने पर शिवानी ने इसे अपने लिए गौरव का क्षण बताया और बुंदेली लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम करने की बात कही।

शिवानी मूल रूप से मोंठ नगर के मोहल्ला अखाड़ापुरा निवासी सुरेश खरे की पुत्रवधू हैं। ऐसे में उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ मोंठ कस्बे में भी खुशी का माहौल है।

मोंठ की शिवानी ने महोबा के कजली महोत्सव में अपनी बुंदेली आवाज का ऐसा रंग बिखेरा कि श्रोता तालियां बजाने को मजबूर हो गए। यह उपलब्धि केवल एक कलाकार की सफलता नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की लोक परंपरा और मोंठ की सांस्कृतिक पहचान के लिए भी गौरव की बात है।

जरूरत है कि शिवानी जैसे स्थानीय कलाकारों को बड़े मंच मिलें, ताकि बुंदेली लोकगीतों की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक इसी तरह अपनी मिठास और पहचान के साथ पहुंचती रहे।

News 30 Express
Author: News 30 Express

Leave a Comment

और पढ़ें