*बिछड़े मासूमों के लिए पिंक बूथ बना फरिश्ता, अपनों से बिछड़े दो नन्हे चिरागों को मिली मां-बाप की छांव*
अपनों से बिछड़ने का दर्द क्या होता है, यह उन माता-पिता से पूछिए जिनके कलेजे के टुकड़े उनकी नज़रों से ओझल हो जाएं। लेकिन ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख थाना क्षेत्र में पुलिस की तत्परता और ममतामयी पहल ने एक परिवार को बिखरने से बचा लिया।
सात साल की सलोनी और दो साल की हिमांशी, जो सड़कों पर लावारिस भटक रही थीं, अब अपने माता-पिता की सुरक्षित पनाह में हैं। शाम का वक्त था, जब गौर सिटी मॉल की भीड़भाड़ के बीच दो नन्हे बच्चे बदहवास और परेशान घूम रहे थे। पिंक बूथ पर तैनात महिला दरोगा की नज़र इन मासूमों पर पड़ी। पुलिसकर्मी ने कर्तव्य के साथ-साथ ममता दिखाते हुए बच्चों को अपने पास बैठाया, उन्हें चुप कराया और उनका नाम पूछा। बच्चों ने अपना नाम सलोनी और हिमांशी बताया और पिता का नाम फूलचंद। पुलिस ने बिना देरी किए सूचना उच्चाधिकारियों को दी और सोशल मीडिया के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
पुलिस की मेहनत तब रंग लाई जब बच्चों के माता-पिता का पता चला। पिता फूलचंद, जो लोटस वैली स्कूल में माली हैं और माँ गुड़िया, जो कैंटीन में काम करती हैं, शाम 5 बजे से अपने बच्चों को पागलों की तरह ढूंढ रहे थे। पुलिस टीम ने कागजी कार्रवाई पूरी कर सुरक्षित तरीके से बच्चों को उनके माता-पिता के सुपुर्द किया। बच्चों के मिलने भावुक होते हुए पिता फूलचंद ने कहा पुलिस फरिश्ता बनकर आई। स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया पर लोग बिसरख पुलिस की इस ‘क्विक रिस्पांस’ और संवेदनशीलता की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
पुलिस के लिए यह सिर्फ एक ड्यूटी नहीं, बल्कि दो जिंदगियों को महफूज करने की जंग थी। अगर ये बच्चे किसी गलत हाथों में पड़ जाते, तो अंजाम भयावह हो सकता था। आज पुलिस महकमे में भी चैन की सांस है और उस परिवार के घर में खुशियां वापस लौट आई हैं।








