न्यायालय का आदेश हवा में, हरिजन महिला जमीन पर! मोठ में दबंगों का खुलेआम तांडव, पुलिस की चुप्पी सवालों के घेरे में”…

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“न्यायालय का आदेश हवा में, हरिजन महिला जमीन पर! मोठ में दबंगों का खुलेआम तांडव, पुलिस की चुप्पी सवालों के घेरे में”

झाँसी के मोठ क्षेत्र से कानून व्यवस्था पर सीधा तमाचा मारने वाला मामला सामने आया है, जहाँ न्यायालय के यथास्थिति आदेश को रौंदते हुए दबंगों ने न सिर्फ जमीन पर कब्जे की कोशिश की, बल्कि एक हरिजन महिला को जातिसूचक गालियाँ देकर जान से मारने की धमकी तक दे डाली।
ग्राम कम्हरार निवासी श्रीमती ममता पत्नी आत्माराम के अनुसार, 22 दिसंबर 2025 को दिनदहाड़े करीब 12 बजे सियाशरण और भगवानदास पुत्र शिवदयाल उनके दरवाजे के सामने मिट्टी डालकर अवैध निर्माण करने लगे। जब पीड़िता ने विरोध किया और सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मोठ द्वारा पारित यथास्थिति आदेश की याद दिलाई, तो दबंग आगबबूला हो गए। जाति सूचक अपशब्द बोले गए, खुलेआम धमकी दी गई—“रोका तो जान से मार देंगे।”
पीड़िता का पति गंभीर रूप से बीमार है, घर में डर का माहौल है, लेकिन दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अदालत के आदेश के बावजूद रास्ता रोककर चबूतरे जैसा ढांचा खड़ा कर लिया गया। सवाल यह है कि क्या कानून सिर्फ कागजों में चलता है?
पीड़िता ने 24 दिसंबर 2025 को थाना मोठ में लिखित शिकायत दी, लेकिन एक हफ्ते से ज्यादा बीतने के बावजूद न एफआईआर, न कार्रवाई। क्या यह लापरवाही है या दबंगों का दबाव? क्या अनुसूचित जाति की महिला की सुरक्षा की कोई कीमत नहीं?
अब पीड़िता ने क्षेत्राधिकारी मोठ से गुहार लगाई है कि दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि कानून, अदालत और संविधान की गरिमा का है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो संदेश साफ है—दबंगों के आगे सिस्टम बौना है।

News 30 Express
Author: News 30 Express

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