“धान पर दोहरी लूट — मंडी में व्यापारियों का किसानों पर प्रहार!”
“एक ओर किसान बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई फसल का दर्द झेल रहा है,
और दूसरी ओर मंडियों में बैठे व्यापारी उसका खून चूस रहे हैं!
झांसी जनपद के मोंठ इलाके से आई इस चिट्ठी ने खोल दी है मंडी व्यवस्था की पोल…
जहां किसान के खून-पसीने से उगी फसल पर 2% की जबरन कटौती की जा रही है।
और इतना ही नहीं — 60 किलो की बोरी पर डेढ़ किलो धान और तोला जा रहा है!”
“मोंठ क्षेत्र के किसानों की यह पुकार अब जिलाधिकारी तक पहुंची है।
ग्राम अटरिया के प्रधान प्रहलाद सह ‘लल्ला’ ने चिट्ठी लिखकर बताया है
कि हर साल मंडी व्यापारी किसानों की मेहनत पर 2 प्रतिशत की जबरन कटौती करते हैं।
कहते हैं — ये ‘दाग’ का पैसा है,
लेकिन असल में यह किसानों की जेब पर डाका है!
धान तौलने में भी चालाकी की जाती है —
जहां 60 किलो बोरी में डेढ़ किलो धान ‘फालतू’ तौल लिया जाता है।
एक महीने बाद भुगतान, ऊपर से बेमौसम बारिश की मार…
किसान का हर दाना पसीने से नहीं, अब आंसुओं से भीगा है।
प्रहलाद सह ने जिलाधिकारी से मांग की है
कि इस ‘कटौती प्रथा’ पर तत्काल रोक लगाई जाए
और किसानों की धान उचित मूल्य पर खरीदी जाए।
बुंदेलखंड के किसान पहले ही मौसम से हारे हैं,
अब मंडी की मंडली उन्हें लूट रही है।









