बेमौसम बरसात से फसल बर्बादी पर प्रहलाद सिंह लल्ला का जिलाधिकारी को पत्र — किसानों ने मांगी तत्काल राहत
“धान से भीगा बुंदेलखंड, उम्मीदों की फसल ज़मीन पर”
बुंदेलखंड के किसानों पर फिर टूटा आसमान का कहर। झांसी जिले की मोंठ तहसील क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
ग्राम पंचायत अटरिया के प्रधान प्रहलाद सिंह लल्ला ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बताया है कि 27 और 30 अक्टूबर को हुई भारी बारिश से करीब अस्सी प्रतिशत धान और मूंगफली की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
धान की फसल भारी होने के कारण खेतों में गिर गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रधान ने प्रशासन से मांग की है कि खेत-खेत सर्वे कराया जाए और किसानों को दैवीय आपदा राहत कोष से तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए।
बरसात ने न सिर्फ खेतों को डुबोया है, बल्कि किसानों के सपनों को भी भिगो दिया है।
“धान की बालियाँ जब झुकती हैं तो किसान के चेहरे पर मुस्कान आती है,
पर इस बार वही झुकी बालियाँ दर्द बन गईं…
मूसलाधार बारिश ने मेहनत को मिट्टी में मिला दिया।
बुंदेलखंड का अन्नदाता अब राहत की आस में आसमान देख रहा है…”
- “किसान की फसल नहीं, उसका भविष्य गिर पड़ा है ज़मीन पर।”
- “सरकार की नीतियाँ आसमान में, और किसान की उम्मीदें पानी में डूबीं।”
- “बुंदेलखंड फिर रोया है — इस बार बारिश में नहीं, बेबसी में।”









