तीर्थ स्थली एरच यश प्रचार रथ यात्रा की रूपरेखा तय..

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बुंदेलखंड की धरती पर बसे प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैभव से परिपूर्ण एरच तीर्थ स्थल को पुनः उसकी पहचान दिलाने की दिशा में अब ठोस पहल शुरू हो गई है। इसी कड़ी में श्री भक्त प्रह्लाद जनकल्याण संस्थान ने एक विशेष यात्रा कार्यक्रम की रूपरेखा तय की है, जिसके अंतर्गत “एरच यश प्रचार रथ यात्रा” पूरे जिले में निकाली जाएगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य न केवल एरच के विस्मृत गौरव को जन-जन तक पहुँचाना है, बल्कि बुंदेलखंड के लोगों में अपनी विरासत और धार्मिक धरोहर के प्रति गहरी आस्था और जुड़ाव स्थापित करना भी है।

बैठक में बनी सहमति

यात्रा की रूपरेखा को अंतिम रूप देने हेतु संस्थान की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में संस्थान के प्रबंधक संत उमेश दत्त गिरि शांडिल्य महाराज ने कहा कि “एरच केवल एक नगर या स्थान नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की आत्मा है। इसका गौरवशाली इतिहास, पुरातन मंदिर और पौराणिक परंपराएँ हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं। इस विस्मृत वैभव को पुनर्जीवित करना और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबका परम कर्तव्य है।”

उन्होंने आगे कहा कि रथ यात्रा जिले के प्रत्येक कोने तक जाएगी और लोगों को यह संदेश देगी कि एरच जैसे तीर्थ की महिमा को संजोना और उसका यशगान करना सामूहिक जिम्मेदारी है।

अध्यक्ष का वक्तव्य

बैठक की अध्यक्षता कर रहे संस्थान के अध्यक्ष अमित चौरसिया ने बताया कि इस यात्रा की शुरुआत से पहले 31 अगस्त 2025 को दोपहर 2 बजे किलागढ़ी हनुमान मंदिर, एरच में नगर स्तरीय सामूहिक बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में नगर के सभी प्रमुख नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, धर्माचार्य और आमजन शामिल होंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एरच की पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए यह यात्रा ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

यात्रा की विशेषताएँ

  • सम्पूर्ण जिले की परिक्रमा: यात्रा केवल प्रतीकात्मक रूप से न होकर पूरे जिले का भ्रमण करेगी, ताकि प्रत्येक गाँव, कस्बा और नगर तक एरच की महिमा का संदेश पहुँच सके।
  • धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन: यात्रा के दौरान कीर्तन, भजन संध्या, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
  • इतिहास से जुड़ाव: एरच के प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों और उनसे जुड़े प्रसंगों की जानकारी पुस्तिकाओं और प्रचार सामग्री के माध्यम से लोगों तक पहुँचाई जाएगी।
  • जनभागीदारी: यात्रा को जन-जन का उत्सव बनाने के लिए प्रत्येक स्थान पर स्थानीय लोगों को जोड़ने की योजना बनाई गई है।

सहभागी पदाधिकारी एवं सदस्य

इस महत्वपूर्ण बैठक में संस्थान के प्रबंधक संत श्री उमेश दत्त गिरि शांडिल्य महाराज, अध्यक्ष अमित चौरसिया, उपाध्यक्ष अशोक दुबे, उपप्रबंधक शंकर लाल, कोषाध्यक्ष रघुवीर शरण श्रीवास्तव, सदस्य परशुराम यादव, चुनीलाल उदैनिया, घनश्याम यादव, राम प्रकाश चौरसिया, अरुण सोनी, यशपाल सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर से इस रथ यात्रा को सफल बनाने के लिए योगदान और सहयोग का संकल्प लिया।

एरच का ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व

एरच सदियों से आस्था और संस्कृति का केंद्र रहा है। यहाँ स्थित प्राचीन मंदिर और तीर्थस्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा भी हैं। एरच को “भक्त प्रह्लाद की भूमि” माना जाता है और इसीलिए यह स्थान धार्मिक साहित्य और लोककथाओं में भी उल्लेखनीय है। समय के साथ इसकी पहचान धूमिल पड़ गई थी, लेकिन अब संस्थान का प्रयास है कि इसे पुनः उसी गरिमा और वैभव के साथ स्थापित किया जाए।

जनता से अपील

संस्थान के पदाधिकारियों ने जिले के सभी नागरिकों से इस रथ यात्रा में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि जब तक समाज के सभी वर्ग इसमें सहभागिता नहीं करेंगे, तब तक यह पहल अधूरी रहेगी। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की है कि वे इस सांस्कृतिक जागरण अभियान का हिस्सा बनें और अपनी धरती के गौरव को पुनर्जीवित करें।

निष्कर्ष

निश्चित रूप से एरच यश प्रचार रथ यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि यह बुंदेलखंड की आत्मा, संस्कृति और गौरव को पुनः जीवंत करने का प्रयास है। यह यात्रा समाज को जोड़ने, सांस्कृतिक चेतना जगाने और धार्मिक धरोहर को सहेजने की दिशा में ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगी। यदि जिलेवासी एकजुट होकर इसमें भाग लेते हैं तो न केवल एरच की पहचान को पुनः सम्मान मिलेगा, बल्कि बुंदेलखंड की समृद्ध परंपरा भी नई पीढ़ी तक पहुंचेगी।

 

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News 30 Express
Author: News 30 Express

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