*उत्तम संयम जीवन का आभूषण है*
*आदि शास्त्री*
बरुआसागर (झासी) दशलक्षण पर्व पर सांगानेर जयपुर से पधारे पंडित आदि शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक बनता है जब वह मर्यादा और संयम के मार्ग पर चलता है। जब तक मनुष्य अपने संस्कारों और संस्कृति की मर्यादाओं में बंधा रहता है, तब तक वह समाज ,और विश्व के लिए वरदान सिद्ध होता है; किंतु जब वह अमर्यादित जीवन जीने लगता है, तब वह स्वयं के साथ-साथ संपूर्ण विश्व के लिए अभिशाप बन जाता है संयम जीवन का आभूषण है। जिस प्रकार नदी तटबंधों में बहते हुए मनमोहक लगती है, परंतु बाढ़ बनकर विकराल रूप धारण कर ले तो विनाश का कारण बन जाती है, उसी प्रकार मनुष्य भी संयमित होकर ही सुंदर और उपयोगी लगता है
संयम धारण करने के लिए हमें सबसे पहले अपने संस्कार और संस्कृति को समझना चाहिए। ‘जियो और जीने दो’ की भावना को आत्मसात किए बिना संयम की पूर्णता संभव नहीं। उत्तम संयम धर्म के दिन
भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य सेठ संदीप जैन मयंक जैन कनाडा,निर्भय नायक,रमेश जैन मावा,एवं उत्तम त्याग धर्म के दिवस शांतिधारा करने का परम सौभाग्य वरुण चौधरी,पवन जैन गुड्डू,अनुपम जैन,चौधरी कमलेश जैन एवं उत्तम चंद्र जैन चिरगांव को प्राप्त हुआ उपरांत देव शास्त्र गुरु एवं दशलक्षण धर्म की सामूहिक पूजन द्रव्य सामग्री से की गई।
उपरांत रात्रि में संगीतमय आरती पर पुरूष महिलाओं ने जमकर नृत्य किया उसके बाद एक मिनट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका निर्देशन पूनम जैन एवं नीतू जैन ने किया।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार दिगम्बर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष सिंघई संदीप जैन ने किया।
रिपोर्टर विनोद साहू








